
पत्थलगांव नगर पालिका—विकास के नाम पर ‘झुनझुना’, सवालों के घेरे में व्यवस्था
पत्थलगांव। मुख्यमंत्री के गृह जिला और गृह विधानसभा क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद पत्थलगांव में विकास को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर पंचायत से नगर पालिका बनने की घोषणा के समय जहां सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए जमकर वाहवाही बटोरी थी, वहीं नगर पालिका बनने के बाद शहर के विकास कार्य लगभग ठप्प पड़ते दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका बनने के बाद अधोसंरचना विकास के लिए जिस स्तर पर योजनाएं और बजट आना चाहिए था, वह अब तक नजर नहीं आ रहा है। जिले के अन्य नगरीय निकायों—खासकर कुनकुरी और जशपुर नगर पालिका—को अधोसंरचना मद में करोड़ों रुपये की राशि आबंटित की गई, लेकिन जिले की आर्थिक नगरी माने जाने वाले पत्थलगांव को अब तक कोई उल्लेखनीय राशि नहीं मिल पाई है। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर पत्थलगांव के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
गौरतलब है कि नगर पालिका पत्थलगांव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत अधिकांश पार्षद सत्ता पक्ष से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद नगर में विकास कार्यों के लिए फंड की कमी बताई जा रही है, जो आम लोगों की समझ से परे है। नगरवासियों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि सत्ता पक्ष से हैं तो फिर विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन क्यों नहीं जुट पाए।
नगर पालिका भ्रष्टाचार के आरोपों से भी घिरी
नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। बताया जाता है कि राशन कार्ड बनवाने के लिए लोगों को रोजाना नगर पालिका के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई नागरिकों ने आरोप लगाया कि महीनों गुजर जाने के बावजूद आज तक उनके राशन कार्ड नहीं बन पाए हैं और उनकी समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि नगर पालिका में बैठे जिम्मेदार जनप्रतिनिधि अक्सर एसी कमरों में ही सीमित रहते हैं और आम नागरिकों की समस्याओं से दूरी बनाए रखते हैं। यही जनप्रतिनिधि चुनाव के समय घर-घर जाकर वोट मांगते दिखाई देते हैं, लेकिन चुनाव के बाद लोगों की समस्याओं को लेकर सक्रियता कम हो जाती है।
सूत्रों के अनुसार, मकान निर्माण अनुमति, अवैध कब्जा, अतिक्रमण और एनओसी जैसे मामलों में भी अनियमितताओं और कथित वसूली की चर्चाएं आम हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन चर्चाओं ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री का गृह जिला होने और चुनाव के समय विधायक गोमती साय द्वारा शहर का कायाकल्प करने की घोषणा के बावजूद यदि पत्थलगांव नगर पालिका को लेकर सरकार और प्रशासन का नजरिया उदासीन बना रहता है, तो यह क्षेत्र के विकास के लिए चिंताजनक स्थिति है।

