📅 दिनांक: 28 मई 2025
✍️ Jan Awaaz न्यूज़ डेस्क | छत्तीसगढ़ ब्यूरो
छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला, जिसे दशकों से नक्सलवाद का गढ़ माना जाता था, अब नक्सलमुक्त घोषित कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने बस्तर को वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism – LWE) से प्रभावित जिलों की सूची से औपचारिक रूप से हटा दिया है।
🔍 क्या है LWE सूची?
LWE यानी Left Wing Extremism सूची में वे जिले शामिल होते हैं जो माओवादियों और नक्सलियों के हिंसक हमलों से प्रभावित होते हैं। केंद्र सरकार इस सूची के आधार पर राज्यों को विशेष सुरक्षा सहायता और विकास पैकेज देती है।
🏞️ बस्तर का इतिहास
- बस्तर कई वर्षों तक माओवादियों का गढ़ रहा है।
- जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और आदिवासी इलाकों की वजह से यह क्षेत्र माओवादियों के लिए उपयुक्त माना जाता था।
- सैकड़ों जवानों और नागरिकों ने नक्सली हमलों में जान गंवाई।
🛡️ अब क्यों हटाया गया?
गृह मंत्रालय के अनुसार:
“बस्तर में पिछले कुछ वर्षों में माओवादियों की गतिविधियां लगातार घटी हैं। सुरक्षाबलों की कार्यवाहियां और केंद्र-राज्य सरकार की संयुक्त रणनीतियों के कारण शांति स्थापित हुई है।”
इसके अलावा:
- स्कूल, अस्पताल, सड़क, और रोजगार से जुड़े विकास कार्यों में तेजी आई है।
- जनजातीय समुदायों में विश्वास बहाल हुआ है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में अब पुलिस और प्रशासन की पहुंच मजबूत हो गई है।
📊 आंकड़ों में बदलाव
- पिछले 3 वर्षों में हिंसा की घटनाएं 70% तक घटी हैं।
- 100 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।
- विकास कार्यों की वजह से युवाओं का झुकाव मुख्यधारा की ओर बढ़ा है।
🗣️ राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने इस घोषणा को “ऐतिहासिक सफलता” बताया और कहा:
“यह राज्य की पुलिस, CRPF, और आम नागरिकों के धैर्य और त्याग का नतीजा है।”
🔚 निष्कर्ष
बस्तर को LWE सूची से हटाना राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास नीति दोनों के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह संकेत है कि भारत अब नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ रहा है।

