पत्थलगांव: जिला का वादा, विकास अब भी 1 किमी दूर। “ सपना… या सिर्फ चुनावी जुमला?

“पत्थलगांव: जिला का वादा, विकास अब भी 1 किमी दूर। “ सपना… या सिर्फ चुनावी जुमला?
जशपुर। पत्थलगांव को जिला बनाने का वादा कर चुनाव जीतने वाली भाजपा अब अपने ही वादों से मुकरती नजर आ रही है। पत्थलगांव की भाजपा विधायक गोमती साय ने हाल ही में जिला बनाने के मुद्दे पर “लायजनिंग करा लेने” की बात कहकर इस महत्वपूर्ण मांग को मानो ठंडे बस्ते में डाल दिया है।अब लायजनिंग कौन कराएगा स्थानीय भाजपा नेताओं में यह माद्दा तो दिख नहीं रहा। जबकि चुनावी मंचों से कई बार गोमती साय द्वारा पत्थलगांव को जिला बनाने का आश्वासन दिया जा चुका है।
गौरतलब है कि भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले पत्थलगांव में मंच से कहा था कि “पत्थलगांव से विधायक दो, हम पत्थलगांव को जिला बना देंगे।” जनता ने भरोसा करते हुए शिव शंकर पैकरा को विधायक बनाया, लेकिन कई विकास कार्यों के बावजूद पत्थलगांव जिला नहीं बन सका। इससे नाराज जनता ने बाद में उन्हें लगभग 35 हजार वोटों से हराकर कांग्रेस के रामपुकार सिंह को जिताया।
रामपुकार सिंह के कार्यकाल में भी कई विकास कार्य हुए, लेकिन जिला बनने का सपना अधूरा ही रहा। इसके बाद भाजपा ने फिर वही वादा दोहराया और गोमती साय विधायक बनी , भाजपा सरकार ने जिला तो नहीं पत्थलगांव को नगर पंचायत से नगरपालिका घोषित जरूर कर दिया, लेकिन सुविधाओं की स्थिति आज भी कई मामलों में ग्राम पंचायत से भी बदतर बताई जा रही है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी इसी पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र से आते हैं, इसके बावजूद क्षेत्र कई बुनियादी सुविधाओं के मामले में पिछड़ा हुआ नजर आता है। मुख्यमंत्री द्वारा किलकिलेश्वर धाम मंदिर में लगभग 12 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा जरूर की गई, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
पत्थलगांव बस स्टैंड की हालत इसका बड़ा उदाहरण है, जहां अब तक एक ढंग का शौचालय तक नहीं बन पाया है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर पत्थलगांव को जिला बनाने का वादा कब पूरा होगा, या यह सिर्फ चुनावी भाषणों का हिस्सा बनकर रह जाएगा।
स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि कुछ नेता विकास की बजाय अन्य गतिविधियों में ज्यादा व्यस्त हैं—जैसे जमीन दलाली, सरकारी दफ्तरों में कथित वसूली, कर्मचारियों को धमकाना, निजी वाहनों में डीजल-पेट्रोल भरवाना या तबादले के नाम पर लेन-देन जैसी बातें भी सामने आ रही हैं।
अब पत्थलगांव की जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या वह फिर से वादों के भरोसे रहेगी, या इस बार ऐसे जनप्रतिनिधि को चुनेगी जो जिला बनाए या न बनाए, लेकिन क्षेत्र के हित में ईमानदारी से काम जरूर करे।

Related posts

\